सिंह की पहली दहाड़

सिंह की पहली दहाड़

नमस्ते, एस्ट्रोमैंज़िल परिवार।

पिछले कुछ दशकों में हिंदुओं को एक ऐसी मानसिकता में ढाला गया है—जिसे 'सेक्युलर' और 'लिबरल' कहा जाता है—कि उन्हें अपने ही धर्म पर शर्म आने लगी है। अगर कोई हिंदू कहता है कि गाय माँ है, तो उसे 'कट्टर' कहा जाता है। अगर कोई हिंदू कहता है कि जाति व्यवस्था वैज्ञानिक है, तो उसे 'जातिवादी' करार दिया जाता है। अगर कोई हिंदू कहता है कि मंदिर उसकी पहचान है, तो उसे 'सांप्रदायिक' बता दिया जाता है।

लेकिन आज एस्ट्रोमैंज़िल पर मैं साफ़-साफ़ कह रहा हूँ—यह रोना-धोना बंद करो।

इस सप्ताह हम लाए हैं एक विशेष श्रृंखला—'सनातन का सिंहनाद'। अगले 6 दिनों में हम हिंदू धर्म के हर उस पहलू पर बात करेंगे, जिसे दुनिया 'विवादास्पद' कहती है, पर हम उसे 'गौरव' कहते हैं।

हिंदू धर्म कोई कमज़ोर, डरपोक और अवैज्ञानिक मान्यता नहीं है। यह एक ऐसी जीवन-पद्धति है जिसने हज़ारों सालों तक पूरी दुनिया को सभ्यता सिखाई। अगर आज यह 'विवादास्पद' लगता है, तो यह हमारी कायरता है, हमारे धर्म की नहीं।

सनातन प्रबल है, पराजित नहीं। और इसी प्रबलता का जश्न मनाने के लिए यह श्रृंखला समर्पित है।

आज का प्रश्न: क्या आपको अपने धर्म पर गर्व है, या आप भी उन 'उदारवादियों' में शामिल हैं जो अपना मुँह छिपाते हैं? कल से शुरू होगा असली 'सिंहनाद'। जय सनातन!